हरि चरणों में अंतिम प्रार्थना ( आर्त भक्त )
हे मेरे इष्टदेव ! हे हरि , हे गुरुदेव! अब इस संसार कि मुझे कोई चाह नहीं । हर तरफ तो तेरे प्रोफेशनल लोगो कि भीड़ हैं जिसे आपसे प्रेम करने में भी मतलब चाहिए। मुझे तो इन्होने मानसिक रोगी ही समझ रखा हैं । और इनकी इस समझ को प्रभु आपने भी तो इतना सहारा दिया...
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Virender Rawal
हरि शरणम्
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[25 Mar 2010 10:46 AM]



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