ख्यालों के खेल में-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (khyalon ke khel men-hindi satire poem)
खुद रहे जो जिंदगी में नाकामदूसरों को कामयाबी कापाठ पढ़ा रहे हैं।सभी को देते सलीके से काम करने की सलाह,हर कोई कर रहा है वाह वाह,इसलिये कागज पर दिखता है विकास,पर अक्ल का हो गया विनाश,एक दूसरे का मुंह ताक रहे सभीकाम करने के लियेजो करने निकले कोई उसकी टांग...
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दीपक भारतदीप
sher
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[25 Mar 2010 10:32 AM]



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