ख्यालों के खेल में-हिन्दी व्यंग्य कवितायें (khyalon ke khel men-hindi satire poem)

दीपक भारतदीप की शब्द प्रकाश-पत्रिका खुद रहे जो जिंदगी में नाकामदूसरों को कामयाबी कापाठ पढ़ा रहे हैं।सभी को देते सलीके से काम करने की सलाह,हर कोई कर रहा है वाह वाह,इसलिये कागज पर दिखता है विकास,पर अक्ल का हो गया विनाश,एक दूसरे का मुंह ताक रहे सभीकाम करने के लियेजो करने निकले कोई उसकी टांग... [पूरी पोस्ट]
writer दीपक भारतदीप

sher

views
12
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
0
[25 Mar 2010 10:32 AM]

Free Vedic Astrology From Astrobix