यूँ तो किस किस को ना कहा दोषी

परवाज -प्रकाश पाखी था रिभु जिस गुनाह का दोषी चुप थी अहल्या जिसे कहा दोषी न्याय जब जब न कर सके गौतम शैल तू बनकर उसे बना दोषी जब जले घर किसी के,चुप थे सब कह रहे अब कि थी हवा दोषी अपने हाथों चुनी थी बर्बादी अब कहे है तेरी दुआ दोषी हार... [पूरी पोस्ट]
writer प्रकाश पाखी
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[23 Mar 2010 13:32 PM]

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