बच्चे,खेल,बागान

parul chaand pukhraaj kaa..... गर्मियों के लम्बे शुरुआती दिनों मेंदुमंजिले पर बसे बच्चेअधिक बेसब्री से करते हैं सांझ घिरने का इंतज़ारपाँच बजते न बजतेचहकने लगतीं हैं सेक्टर कीसूनी गलियाँखटकने लगते हैं फोनबजती हैं घंटियाँकभी छुपाये तो कभीजान कर लुढ़काये जाते हैंदूध के आधे-पौने ग्लासऊपर... [पूरी पोस्ट]
writer पारूल
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[25 Mar 2010 07:42 AM]

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