शोकगीत नहीं, उल्लास का उत्सवः पढ़िए अरुंधति को
आनेवाले दशकों में शायद इसे एक क्लासिक की तरह पढ़ा जाएगा. इन बेहद खतरनाक- और उतने ही शानदार- दिनों के बारे में एक विस्तृत लेखाजोखा. पिछले एक दशक से अरुंधति के लेखन में शोकगीतात्मक स्वर बना हुआ था, पहली बार वे इससे बाहर आई हैं और पहली बार उनकी किसी रचना...
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Reyaz-ul-haque
शांति का मतलब है युद्ध
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[25 Mar 2010 07:07 AM]



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