मस्ती के पथ बढ़ते जाते
सब दुनिया की धुआं उड़ातेहसते -हसते,गाते-गातेआशाओं की कश्ती लेकरमस्ती के पथ बढ़ते जातेधूम-धड़ाके,सैर-सपाटेपुष्प बने मग के सब कांटेहम हैं,हम हैं,हम ही हैंदुनिया में बाकी सब गम हैयही सोचकर,यही समझ करइसीलिए इस पथ पर बढ़ करअपनी जय जय करते जातेमस्ती के पथ बढ़ते...
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राहुल पंडित
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[25 Mar 2010 05:02 AM]



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