अन्तिम विदाई

safar ke sajde mein 12 मार्च , चाचा जी ऐसे चले गए जैसे बड़े भाई के पीछे-पीछे लक्ष्मण चले गए हों अपने लिए कितने कठोर नियम थे और दुनिया के लिए कितने नर्म दिल ! तीस साल पहले कितने ही गाँवों के सरपँच रहे ...निष्पक्ष फैसले और राजा जैसे दिल के साथ सबका आदर-सत्कार प्रसिद्धि तो... [पूरी पोस्ट]
writer शारदा अरोरा
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[25 Mar 2010 03:55 AM]

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