सीटी बज गई

कुछ कहानियाँ,कुछ नज्में "अरे लल्ला कहे किताबन में मूढ़ घुसाए बैठा है तानी सिट्टी बजाये की परकत्तिस तो कर लेव" अरे राम रे पूरे गाम का बवाल मचा, जवान और बुड्ढे सभी सिट्टी बजाये में लगे है , जब से पहिलवान जी कहिन है संसद में सिट्टी बजिहें तभी से सब होंठ गोल किये घूम रहे है, जो... [पूरी पोस्ट]
writer Sonal Rastogi

आरक्षण

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[25 Mar 2010 02:53 AM]

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