सहजीवन के दो उदाहरण - प्रेमचंद से
राजकिशोर प्रेमचंद को जितनी बार पढ़ा जाए, उतनी बार लगता है कि वे अपने समय से आगे थे। उन्होंने सिर्फ बात बनाने के लिए नहीं कहा था कि साहित्य राजनीति की मशाल है। वे इसमें यकीन भी रखते थे। यह दुख की बात है कि प्रेमचंद के प्रशंसक कुछ खास बातों के लिए ही...
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सुजाता
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[25 Mar 2010 01:53 AM]



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