भर्तृहरि नीति शतक-जीवन में आत्मबल को होना आवश्यक (jivan aur atmabal-hindu dharma sandesh)
नाऽस्ति मेघसमं तोयं नाऽस्ति चात्मसमं बलम्।नाऽस्ति चक्षुःसमं तेजो नाऽस्ति धन्यसमं प्रियम।।हिन्दी में भावार्थ-बादलों के जल के अलावा कोई दूसरा जल नहीं है। उसी तरह आत्मबल के अलावा कोई दूसरा बल नहीं है। आंख जैसी कोई अन्य शक्तिशाली इंद्रिय नहीं है और अन्न के...
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दीपक भारतदीप
हिन्दू-धर्म
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[25 Mar 2010 00:08 AM]



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