मैं भी तुझसे क्यों न बात करूं...

Firdaus's Diary वाल्ट व्हिटमेन के शब्दों में " ओ राही! अगर तुझे मुझसे बात करने की इच्छा हुई तो मैं भी तुझसे क्यों न बात करूं... ज़िन्दगी की जद्दोजहद ने इंसान को जितना मसरूफ़ बना दिया है, उतना ही उसे अकेला भी कर दिया है...हालांकि...आधुनिक संचार के साधनों ने दुनिया को एक... [पूरी पोस्ट]
writer फ़िरदौस ख़ान

तब्सिरा

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[24 Mar 2010 22:38 PM]

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