एक दिया बुझ गया
जीवन था उसका क्षणिक,तेज था किन्तु अधिक,कई दीयों को कर प्रज्वलित,एक दिया, अचानक बुझ गया....नकारात्मकता हुयी हरित,और मन का तम हुआ मृत,करके जीवन-राह प्रकाशितएक दिया, आंधी में बुझ गया....आत्मा को रखके पवित्र,करके हम सबको मोहित,छोड़ गया हमको वो मित्र,एक दिया,...
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Jayant Chaudhary
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[24 Mar 2010 03:18 AM]



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