तेरा नाम
कि तेरा नाम मेरे नाम से जुड़ने लगा है /जैसे पृष्ठ एक इतिहास का मुड़ने लगा है //सुबह के स्वप्न सा , तम जरा धुधला पड़ा है /युवा पक्षी समय का, क्षितिज तक उड़ने लगा है //अभी आशा तुम्हारी प्रीत के अनुबंध सी है /कोई क्यों नियम के अधिकार सा कुढने लगा...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[24 Mar 2010 16:55 PM]



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