ग़ज़ल
सभी अलग-अलग उदास हैं /यहाँ कौन ग़म शनाश हैं ?//जहाँ बेहयाई की शर्त हो /वहां शर्म ही बेलिबास है //कोई चोट बीती है टीसती /अब प्यार भी इक प्यास है //जब शाम उतरी धुआं धुआं /वहां पीली-पीली उजास है //क्यों मै ज़िन्दगी की दुआ करूं ?/जो गिनी -गिनी सी ये साँस है...
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डॉ.भूपेन्द्र कुमार सिंह
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[24 Mar 2010 15:27 PM]



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