राम नवमी के मेला
अपना गाँव सडक के किनारे है। थोड़ी बहुत चहल कदमी तो चौबीस घंटे ही रहती पर मेले ठेले के दिन रौनक कुछ और हो होती है। झुण्ड के झुण्ड जाते आते हैं। शहरी प्राणी होने के नाते जल्दी उनमें मिलने की अनुमति नहीं थी। बच्चा है, गुम जायेगा, अकेला कैसे ,किसके साथ रुको...
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rajkumar jha
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[24 Mar 2010 11:08 AM]



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