गुडिया
हूंक उठी दिल में अजीब सीभीग गया तन बिन बारिश केहाहाकार मच गयी रगों मेंसपने बुनते लावारिश सेसोच रहा क्या-क्या लिख दूं मैबध कर जिसमे कैद रहे वोजब भी करवट बदले पन्नेहर करवट के बाद दिखे वोपर दिल तो अभ भी कच्चा हैजैसे छोटा सा बच्चा हैमहसूस करे हर लम्हो कोपर...
[पूरी पोस्ट]
राहुल पंडित
13
0
0
0
2
[24 Mar 2010 09:16 AM]



Shuffle







