बिखर गया जो तार-तार अहसास कहां से लाऊं

मेरी आवाज़ बिखर गया जो तार-तारअहसास कहां से लाऊं तोड दिया खुद तुमने जोविश्वास कहां से लाऊंन दर्द रहा दिल में कोईन रही कोई इसमें धडकनपाहन से सीने में तो अबन विचलित होता है ये मनन आह रही इसमें कोईतो प्यास कहां से लाऊंतुम्हीं बताओ पहला वोअहसास कहां से लाऊंनैनों से नीर... [पूरी पोस्ट]
writer सीमा सचदेव

कविता

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[24 Mar 2010 06:15 AM]

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