जिंदगी पा गया

इयत्ता रतनतुझे पाके मैं हर खुशी पा गयाज्यों सौ साल की जिंदगी पा गया बहारों के सपने भी आने लगेखिजां दूर पलकों से जाने लगेतू है साथ हर सादगी पा गयाज्यों सौ साल की जिंदगी पा गया हुए साथ भंवरे भी गाने लगेथे वीराने जो मुस्कुराने लगेथा सूना जो दिल आशिकी पा गयाज्यों... [पूरी पोस्ट]
writer रतन

poetry

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[24 Mar 2010 06:17 AM]

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