दिल को दिल की बात सुनाने को दिल करता है

Kuchh kahi kuchh unkahi दिल को दिल की बात सुनाने को दिल करता है,कुछ भूली बिसरी बात सुनाने को दिल करता है।उनकी जुल्फें बिखरी बिखरी जैसे हों काले बादल,उनकी चितवन मदहोशी का फैला है जैसे आँचल,लब उनके ऐसे जैसे पगे हों अमृत रस की धार में,उन होठों से पीकर खिल जाने को दिल करता है।उनकी... [पूरी पोस्ट]
writer Nihar Khan
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[24 Mar 2010 03:47 AM]

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