हँसो तुम पर निगाह रखी जा रही जा रही है

दिल-ए-नादाँ हँसो अपने पर न हँसना क्योंकि उसकी कड़वाहट पकड़ ली जाएगीऔर तुम मारे जाओगेऐसे हँसो कि बहुत खुश न मालूम होवरना शक होगा कि यह शख्स शर्म में शामिल नहींऔर मारे जाओगेहँसते हँसते किसी को जानने मत दो किस पर हँसते होसब को मानने दो कि तुम सब की तरह परास्त होकरएक... [पूरी पोस्ट]
writer संदीप पाण्डेय

कविता

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[24 Mar 2010 02:49 AM]

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