जीवन का उद्देश्य और दुनिया में उलझे हम लोग
कभी कभी लगता हैं कि हम इतना जीवन जी लेते हैं पर कोई सार नहीं । और सुबह से शाम तक बस कम में लगे रहो का नारा लेकर मशीन बने रहते हैं । इसमें सबसे बुरा हाल हम कम्पनी कर्मचारिओं का होता हैं । वहां सारी चीज़ें इतनी जटिल होती हैं कि एक बार तो मन करता हैं सारा...
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Virender Rawal
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[24 Mar 2010 02:17 AM]



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