विलंबित प्रसव

GORAKHH इन दिनोंएक चिड़िया व्यस्त हैमेरे आँगन मेंकहाँ कहाँ से बटोरे हुएतिनकों और धागों सेबना रही हैमेरे घर मेंएक और घर.उसे चुनना है अपना आश्रयजिनके पुण्यों सेसंतति को नहीं मिलेगाकोई देवलोककिसी बहेलिये* की पापात्माकोप है लाखों योजन का विस्तार भी.तुम मत गिराओ... [पूरी पोस्ट]
writer Gopal Singh

कुछ शब्द जैसे मैं......

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[23 Mar 2010 15:55 PM]

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