मुस्कान घोलिए....

डॉ. चन्द्रकुमार जैन रह जाए टूटकर कोई ऐसा न बोलिएताला है दिल तो प्यार की चाबी से खोलिएख़ुद का कमाल देखना चाहें तो आप भीचेहरे के हाव-भाव में मुस्कान घोलिएखुशियाँ मिलीं तो प्यार में सबमें वो बाँट दींग़र ग़म मिल तो बैठ के चुपचाप रो लिएरहजन मिल हैं बारहा रहबर की शक्ल मेंवो हम न... [पूरी पोस्ट]
writer Dr. Chandra Kumar Jain
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[24 Mar 2010 00:15 AM]

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