पत्नी की गैरमौजूदगी और मेरा ओछापन
अनिता, अनुनय और मान्या के बिना शुरू के दो दिन तो मैंने खूब चैन से गुजारे। लगा कि 17 मार्च की खुशियां बरकरार हैं। अगर स्वर्ग होता होगा तो शायद उसका सुख यही है। पर तीसरे दिन से ही मेरा भ्रम टूटने लगा। मुझे मेरा घर अचानक पराया लगने लगा। दफ्तर से लौटता तो...
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अनुराग अन्वेषी
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[23 Mar 2010 23:39 PM]



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