कोशल्या का लाड़ला ,केवावे जगदीश ।
राम चालीसा कोशल्या का लाड़ला ,केवावे जगदीश ।किरपा कराजोए मोकळी ,रोज नमावां सीसहुणजो माता जानकी ,दया करे रघुवीर ।चार पुरसारथ मले, ओर मले मा’वीर ।।शब्दार्थ -लाड़ला-परम प्रिय, केवावे-कहलाते है ,जग- संसार,मोकळी-अपार,रोज-प्रतिदिन,नमावां-नमन करते,...
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राजस्थानी
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[23 Mar 2010 22:30 PM]



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