प्रभु से मन को लेकर प्रार्थना

सरल कुमार हे हरि !जब एक हाड़ मास का पिता अपने बच्चो के अपराधो को ना देखकर सिर्फ उन्हें वात्सल्य भाव से गले लगा लेता हैं तो फिर क्यों आप परमपिता होते हुए भी हमारी योग्यता को हिसाब से दर्शन देने को इंतज़ार करवा रहे हैं । हम जैसे हैं प्रभु तेरे हैं। अगर मिटटी से सने... [पूरी पोस्ट]
writer Virender Rawal
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[23 Mar 2010 22:31 PM]

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