‘‘बस’’ (डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री ‘मयंक’)

नन्हें सुमन बस में जाने में मुझको,आनन्द बहुत आता है।खिड़की के नजदीक बैठना,मुझको बहुत सुहाता है।।(चित्र गूगल सर्च से साभार) पहले मैं विद्यालय में,रिक्शा से आता-जाता था।रिक्शे-वाले की हालत पर,तरस मुझे आता था।।(चित्र गूगल सर्च से साभार)लेकिन अब विद्यालय में,इक... [पूरी पोस्ट]
writer डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक

बालकविता

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[23 Mar 2010 21:28 PM]

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