चहबच्ची......इसराफील........और मैं ..............सतीश पंचम

सफ़ेद घर चहबच्ची**                                     वो चहबच्ची अब कहां से खोद लाउं छिपाये जिसमें थे दिन अमनों- सूकून केअब तो वह जमीन भी बंट चुकी है नपी है चहबच्ची भी जमकर... [पूरी पोस्ट]
writer सतीश पंचम

कविता

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[23 Mar 2010 21:45 PM]

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