लव.. सेक्स.. धोखा. और सच
लव, सेक्स और धोखा। इन तीनों में से कोई भी शब्द हाईपोथैटिकल और नया नहीं है। तीनों इन्सानी फितरत के हिस्से हैं। और इसी तरह हिन्दुस्तानी फिल्मों के भी। लेकिन दिबाकर बनर्जी जिस तरीके से इन तीनों को स्क्रीन पे दिखाते हैं उससे फिल्म की ग्रामर को ही एक नई धारा...
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उमेश पंत
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[23 Mar 2010 15:37 PM]



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