ज़िन्दगी कुछ इस तरह
जिंदगी यूँ ही गुज़र जाती है
बातों ही बातों में
फिर क्यों न हम
हर पल को जी भर के जियें, खुशबू को
घर के इक कोने में कैद करें
और रंगों को बिखेर दें
बदरंग सी राहों पर, अपने चेहरे से
विषाद कि लकीरों को मिटा कर...
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nilesh mathur
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[23 Mar 2010 16:24 PM]



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