कानू सान्याल, कम्युनिज्म
कभी-कभी किसी की मौत पर दुख होता है,तो कभी किसी की मौत पर न दुख और न कोई अन्य बोध। मन तटस्थ भाव से उस खास व्यक्ति की पिछली जिंदगी और उसके निष्कर्षों से तारतम्य बैठाने की कोशिश करती है। खबर आयी कि नक्सल आंदोलन के प्रणेता कानू सान्याल नहीं रहे। आत्महत्या कर...
[पूरी पोस्ट]
prabhat gopal
36
4
0
4
5
[23 Mar 2010 15:30 PM]



Shuffle








