उसकी नीलिमा पर बादलों ने लिखा था..

काहे को ब्याहे बिदेस.... अक्सर उसकी आँख बर्तनों के खड़कने की आवाज़ से खुलती है या फेरीवालों और भिखारियों की पुकार से, नहीं तो अखबार वाले या फिर दूधवाले की घंटी से... लेकिन आज ऐसा नहीं हुआ ...पानी की कल-कल से नींद खुली... बाहर आकर देखा तो कटे पाइप से पानी बह रहा है ऐसा लगा जैसे... [पूरी पोस्ट]
writer neera
views
18
upvote
2
downvote
0
rating
2
comments
11
[23 Mar 2010 15:44 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix