निशानी

कुछ पन्ने मेरी दराज़ से.... रात की गहराई में जाने कहाँरोज़ फिरता हूँ दर-बदर,छीनली हैं नींद मेरी जहानने आँखों से इस कदर.ख्वाबों को आँखों में संजोय,सहेज के रखा है कब से.सरहद पलकों की पार न करदे,बहलाया है उनको शब से.सजदा मेरा ये आखरी है तुझसे, आतिश ने मेरे ख्वाब जलाए हैं.अगर आओ कभी... [पूरी पोस्ट]
writer ●๋• नीर ஐ

my poems

views
17
upvote
0
downvote
0
rating
0
comments
3
[23 Mar 2010 13:48 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix