श्री रामचँद्र कृपालु भजु मन

मीनू खरे का ब्लॉग श्री रामचँद्र कृपालु भजु मन हरण भवभय दारुणम्।नवकंज-लोचन, कंज-मुख, कर कंज, पद कंजारुणम्।।कंदर्प अगणित अमित छबि, नवनील-नीरद सुंदरम्।पट पीत मानहु तड़ित रुचि शुचि नौमि जनक-सुतानरम्।।भजु दीनबंधु दिनेश दानव-दैत्य-वंश-निकंदनम्।रघुनंद आनँदकंद कोशलचंद... [पूरी पोस्ट]
writer Meenu Khare

श्री रामचँद्र

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[23 Mar 2010 12:37 PM]

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