गीतिका: बिना नाव पतवार हुए हैं... ---आचार्य संजीव 'सलिल'
गीतसंजीव 'सलिल'*वक़्त ने दिल को दिए हैंघाव कितने?...*हम समझ ही नहीं पाएकौन क्या है?और तुमने यह न समझा मौन क्या है?साथ रहकर भी रहे क्योंदूर हरदम?कौन जाने हैं अजानेभाव कितने?वक़्त ने दिल को दिए हैंघाव कितने?...*चाहकर भी तुम न हमकोचाह पाए.दाहकर भी हम न...
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आचार्य संजीव वर्मा 'सलिल'
samyik hindi kavita
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[23 Mar 2010 13:06 PM]



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