समाज के दरकते खँडहर से एक और ईट का दरकना !
शाशिभूषणतामड़े उवाच;दोस्तों, फिल्मो में आक्रोश में उबल रहे हीरो को हजारो लाखो बार गरजते-बरसते देखा-सूना था कि हीरो जन्मजात बुरा बनके पैदा नहीं हुआ बल्कि देश-समाज के हालात ने उसे बुरा बनने पर मजबूर किया / मेरे साथ-साथ आपने ने भी सैंकड़ो दफा इस किस्म का...
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S B Tamare
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[23 Mar 2010 12:24 PM]



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