मौन बैठे हो क्यों मेरे अशरण शरण..

अखिलं मधुरम् मौन बैठे हो क्यो मेरे अशरण शरण।इस अभागे को क्या मिल सकेगा नहीं,हे कृपामय तेरा कमल-कोमल-चरण।मौन बैठे हो क्यो मेरे अशरण शरण।क्या मेरे इस गिरे हाल में ही हो खुशतुमको भाता हमारा हरामीपना।क्या मेरी दुर्दशा से ही हर्षित हो प्रभुतो सुनो अपनी पूरी करो कामना।तेरी... [पूरी पोस्ट]
writer हिमांशु । Himanshu

भजन

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[23 Mar 2010 12:00 PM]

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