गर्म-आहट
सिकुड़ती रातबाहें फैलाता दिनकरसर्द हवाओं पर अब अधिकार जताती गर्महवासच ही है वक्त से पहले दस्तक दे चुकी हैगर्म-आहटबदन पर चिपचिपा पसीनागले में पानी की कमी सेचुभते शूलशुष्क हवा के साथ उड़ती धूलफाग में मुरझा चले हैंधरती पर कुछ निरीह फूलऊपर अंबर नीचे धरती की...
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anupam mishra
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[23 Mar 2010 06:33 AM]



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