माला के फेर में......

Badlaw ki Taraf... माला फेरत जग फिरा, फिरा ना मन का फेर।कर का मन का डार दे, मन का मनका फेर।।कबीर दास ने इस दोहे में लोगों को यही बताने की कोशिश की थी कि इस संसार में माया को त्याग कर अपने मन को पवित्र करो, माला फेरने से आप इस माया रुपी संसार के भवर से बच नहीं सकते........... [पूरी पोस्ट]
writer Ashok Maurya
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[23 Mar 2010 05:27 AM]

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