सत्तू

मेरी कहानियां पुलिस ,पूछ पाछ के चली गयी ,मैं पुलिस के व्योहार से मैं डर गया ।इसी सोच में पड़ा रहा ,क्या सच में किसी चंगुल में फंस रहा हूँ ?मुझे यहाँ से भागने में समझदारी लगी ,सब कुछ था तो ,पैसा टिकट ,फिर एक ख्याल आया ,मेरे जाने से ,पुलिस का शक पक्का न हो जाय ।की मैं... [पूरी पोस्ट]
writer भंगार
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[23 Mar 2010 02:57 AM]

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