मनीष की कलम से आपके लिए { गौरफरमाइयेगा }
1. सरहदें कहाँ हवा को रोक पाई हैजिन्दगी कहाँ एक पल को थाम पाई है ,ये बस मज़बूरी है ,वर्ना दूरियाँ कहाँ दोस्तीको तोड़ पाई है । (मेरा सबसे पहला शायरी )२.दूरियाँ चाहे जितनी भी हो , दर्द चाहे कितनीभी हो तेरा दामन हम ना छोरेंगे तूफां चाहे -कितनी भी हो ।३.आँखे...
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मनीष झा
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[22 Mar 2010 18:35 PM]



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