दुश्मन नं. 1
दर्शन और कूटनीति कहता है कि यदि किसी देश व समाज को बर्बाद करना है, तो सबसे पहले उसका आर्थिक ताना-बाना नष्टï कर दें। उसकी उलटी गिनती शुरू हो जाएगी। चाहकर भी वह संभल नहीं पाएगा। आर्थिक उदारीकरण के बाद साम्राज्यवादी विचारधारा से ओत-प्रोत कुछ देश दूसरों को...
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सुभाष चन्द्र
चीन
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[23 Mar 2010 00:59 AM]



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