वो जुस्तजू, वो मोड़, वो जंगल नहीं रहा
जूड़े में फूल आंखों में काजल नहीं रहामुझसा कोई भी आपका पागल नहीं रहाताज़ा हवाओं ने मेरी ज़ुल्फ़ें तराश दींशानों पे झूमता था वो बादल नहीं रहामुट्ठी में क़ैद करने को जुगनू कहां से लाऊंनज़दीक-ओ-दूर कोई भी जंगल नहीं रहादीमक ने चुपके-चुपके वो अल्बम ही चाट ली महफूज़...
[पूरी पोस्ट]
फ़िरदौस ख़ान
ग़ज़ल
13
3
0
3
3
[23 Mar 2010 00:18 AM]



Shuffle








