"क्षमा"

aapkayogeshsharma इतना गुमसुम हो गया था जैसे के बेहोश हूँ,खामोशियाँ भी पूछती थीं, इतना क्यों खामोश हूँ,कर रहा था साफ़ बस, मन की सारी मैल को,मशगूल भूलने में था, हर इक पुराने बैर को नाग ढेरों बरसों से, दिल में थे पाले हुए,रंज के बेताल कितने, ख़ुद पे थे डाले हुए,भूत ये करते थे... [पूरी पोस्ट]
writer Yogesh Sharma

क्षमा

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[22 Mar 2010 22:46 PM]

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