खुदकुशी ठान ली चिरागों ने-गज़ल
दिल में लेकर जो प्यास बैठीं हैंक्यों समन्दर के पास बैठी हैं पालकी के यूं पास बैठी हैंसारी सखियां उदास बैठी हैखुदकुशी ठान ली चिरागों नेऑंधियां बदहवास बैठी हैंमौत ने खत्म कर दिये शिकवेसौतनें आस पास बैठी हैंबेटे आफ़िस,बहुएं गईं दफ़्तरघर...
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श्याम सखा 'श्याम'
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[22 Mar 2010 22:08 PM]



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