कॉलर को थोड़ा ऊपर चढ़ा के ....सिगरेट के धुएं का छल्ला बनाके

मयखाना कौन कहता है मर चुकी कविता ? कभी-कभी उसकी साँसों की आवाज़ सन्नाटे में गूंजती है अब भी ये गीत बनकर । कविता माने पोयट्री ज़िन्दा है बॉस ! न मानो तो लो सुन लो ये ग़ज़ल .............. आभार-- टी.सीरीज़... [पूरी पोस्ट]
writer मुनीश ( munish )
views
37
upvote
4
downvote
2
rating
2
comments
4
[22 Mar 2010 15:23 PM]

Free Vedic Astrology From Astrobix