रिश्ते...!

बेटे की सलामती के लिएहलषष्ठी का व्रत रखती है माँहर दिन कामयाबी के लिएदुआ करते हैं पितालंबी उम्र के लिएनिर्जला कर रही है पत्नीऔरभाईयों की नज़र में बाकी है इज़्जतसोचता हूँकितना ज़रूरी हैं रिश्तेअपनी अहमियत के लिएवरना तो चीजों की तरहइस्तेमाल होताआदमी.... [पूरी पोस्ट]
writer Neeraj Shrivastava / Hyderabad, Bhopal, India
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[22 Mar 2010 14:39 PM]

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