कुँवारी किरणें (वेलेंटाइन दिवस पर विशेष)
कुँवारी किरणेंसद्यःस्नात सी लगती हैंहर रोज सूरज की किरणें।खिड़कियों के झरोखों सेचुपके से अन्दर आकरछा जाती हैं पूरे शरीर परअठखेलियाँ करते हुये।आगोश में भर शरीर कोदिखाती हैं अपनी अल्हड़ता के जलवेऔर मजबूर कर देती हैंअंगड़ाईयाँ लेने के लिएमानो सज धज करतैयार...
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Amit Kumar
कविता
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[26 Feb 2010 05:21 AM]



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