दुनिया को बचाना है तो इसे बदलना ज़रूरी है…
जिसे आज आमतौर पर भूमण्डलीकरण कहा जाता है वह दरअसल पूंजी का भूमण्डलीकरण है। श्रम आज भी जंज़ीरों में जकड़ा हुआ है। विकास के इस पूरे विमर्श से समानता का तत्व बाहर हो गया है। इसका सही विकल्प केवल बराबरी पर आधारित एक सामाजार्थिक-राजनैतिक व्यवस्था के ज़रिये...
[पूरी पोस्ट]
अशोक कुमार पाण्डेय
युवा संवाद का आयोजन
19
2
1
1
10
[22 Mar 2010 11:46 AM]



Shuffle








