प्रेम से देखिये तो सही!
जब आप फूलों को पहचानना छोड़साइबर नेट में उलझे होते हैंनासिका रंध्रों में जानी पहचानी बारूदी गंध छाई होती है,बच्चों के हाथ घरौंदे बनाने में, नहींखिलौना पिस्तौल चलाते होते हैं,ऐसे में भीकभी-कभी, कहीं-कहींवासंती बयार झूम ही आती है।जब रात भयावह लंबी हो उठती...
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kamlesh
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[22 Mar 2010 09:32 AM]



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