प्रेम से देखिये तो सही!

kamlesh pandey जब आप फूलों को पहचानना छोड़साइबर नेट में उलझे होते हैंनासिका रंध्रों में जानी पहचानी बारूदी गंध छाई होती है,बच्चों के हाथ घरौंदे बनाने में, नहींखिलौना पिस्तौल चलाते होते हैं,ऐसे में भीकभी-कभी, कहीं-कहींवासंती बयार झूम ही आती है।जब रात भयावह लंबी हो उठती... [पूरी पोस्ट]
writer kamlesh
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[22 Mar 2010 09:32 AM]

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